शतरंज में मात – Class 4 Hindi Chapter 12 Notes & NCERT PDF

Class 4HindiChapter 12NCERT book: वीणा - हिंदी कक्षा 4

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पाठ 12: शतरंज में मात

परिचय

'शतरंज में मात' वीणा (कक्षा 4) का बारहवाँ पाठ है। यह तीन दृश्यों वाला एक हास्य नाटक है (रत्न सागर प्रकाशन से साभार)। इसके नायक तेनाली रामकृष्ण (तेनालीरामन) हैं, जो विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में विदूषक और राज-परामर्शदाता थे और अपनी कुशाग्र बुद्धि के लिए प्रसिद्ध हैं। नाटक दिखाता है कि मुश्किल में घबराने की जगह सूझ-बूझ से रास्ता निकाला जा सकता है।

नाटक में क्या है

पहला दृश्य — दरबारियों की चाल: दरबारी तेनाली से जलते हैं, क्योंकि राजा हर बात पर उसकी प्रशंसा करते हैं। वे उपाय निकालते हैं और राजा से झूठ कहते हैं कि तेनाली शतरंज का अद्भुत खिलाड़ी है और बड़े-बड़ों को मात दे चुका है। राजा उत्साहित होकर मुकाबले की ठान लेते हैं। तेनाली बार-बार कहता है, "शतरंज के विषय में मैं कुछ नहीं जानता, महाराज", पर राजा नहीं मानते। तेनाली समझ जाता है — "चाल चली है सबने।"

दूसरा दृश्य — खेल और राजा का क्रोध: खेल शुरू होता है। तेनाली सचमुच नहीं जानता, इसलिए कभी सबसे पहले मंत्री चलाता है, कभी बेतुका घोड़ा। राजा को लगता है कि वह जान-बूझकर हार रहा है। दरबारी आग में घी डालते हैं। राजा धमकी देते हैं कि फिर हारे तो भरी सभा में सिर मुँड़वा दूँगा। तेनाली का राजा पिट जाता है। क्रोधित राजा शतरंज उलट देते हैं और कल नाई बुलाने का आदेश देते हैं।

तीसरा दृश्य — तेनाली की सूझ-बूझ: नाई उस्तरा लेकर तैयार है। तेनाली पहले कहता है कि उसने अपने बालों पर पाँच हज़ार अशर्फ़ियाँ उधार ली हैं, ऋण चुकाए बिना बाल नहीं कटवा सकता। राजा कोष से पाँच हज़ार अशर्फ़ियाँ उसके घर भिजवा देते हैं। फिर तेनाली आँखें मूँदकर मंत्र पढ़ने लगता है और समझाता है — "हमारे यहाँ माता-पिता के स्वर्ग सिधारने पर ही मुंडन होता है... महाराज, अब आप ही मेरे माता-पिता हैं।" यह सुनकर राजा घबरा जाते हैं और दंड वापस ले लेते हैं। वे मुस्कुराकर कहते हैं कि तेनाली ने अशर्फ़ियाँ भी ले लीं और दंड-अपमान से भी बच गया। दरबारी सिर ठोकते रह जाते हैं — "हाय तेनाली! तुम्हारी बुद्धि ने हमें फिर मात दी।"

मुख्य बातें

  • ईर्ष्या से किया गया षड्यंत्र अंत में षड्यंत्र करने वालों को ही हराता है।
  • सच बोलने के बाद भी मुश्किल आए तो धैर्य और बुद्धि से रास्ता निकालना चाहिए।
  • नाटक में कोष्ठक में लिखे निर्देश (जैसे क्रोधित, चकित, मुँह लटकाए) पात्रों के मनोभाव बताते हैं।
  • शीर्षक में 'मात' के दो अर्थ हैं — शतरंज में हार, और तेनाली की बुद्धि से दरबारियों की हार।
  • पुस्तक की गतिविधियाँ

  • 'किसने, किससे कहा?' — जैसे "अरे, इतने महान आदमी का मुंडन!" (नाई ने राजा से)।
  • समान अर्थ वाले शब्दों का मिलान — प्रशंसा-बड़ाई, युक्ति-उपाय, मात-हार, घाघ-चालाक, माहिर-कुशल, न्योता-आमंत्रण।
  • मटके से विशेषण चुनकर भरना — चतुर तेनाली, गूढ़ चाल, पाँच हज़ार अशर्फ़ियाँ।
  • प्रसन्न, चकित, शांत, दुखी मनोभावों के संवाद लिखना।
  • शतरंज के मोहरों — घोड़ा, हाथी, मंत्री, राजा, ऊँट, प्यादा — की चाल पता करना।
  • लट्टू, साँप-सीढ़ी, राजा-मंत्री-चोर-सिपाही, गुट्टे, अष्टा-चक्कन जैसे खेलों के स्थानीय नाम लिखना।
  • शब्द-भंडार

  • विदूषक — राजदरबार में हँसाने वाला
  • परामर्शदाता — सलाह देने वाला
  • कुशाग्र बुद्धि — बहुत तेज़ बुद्धि
  • मात — हार
  • माहिर — कुशल
  • घाघ — बहुत चालाक
  • युक्ति — उपाय
  • न्योता — आमंत्रण
  • मुंडन — सिर के सारे बाल उतारना
  • ऋण — उधार
  • दीर्घायु — लंबी आयु वाला
  • माता-पिता और शिक्षकों के लिए सुझाव

  • घर में शतरंज हो तो बच्चे को मोहरों के नाम और एक-दो चालें सिखाइए।
  • तेनालीरामन या बीरबल का कोई और किस्सा सुनाइए और उसकी चतुराई पर बात कीजिए।
  • बच्चे से पूछिए कि किसी ने उसके बारे में झूठी बात फैलाई हो तो वह क्या करेगा।
  • नाटक को घर के सदस्यों के साथ अलग-अलग आवाज़ों में पढ़िए।
  • सामान्य भूलें

  • यह मान लेना कि तेनाली सच में शतरंज जानता था; उसने पहले ही कहा था कि उसे खेल नहीं आता।
  • यह सोचना कि राजा ने तेनाली को सज़ा दे दी; अंत में राजा ने दंड वापस ले लिया।
  • 'मात' को 'माता' से जोड़ना; यहाँ मात का अर्थ हार है।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓दरबारियों ने ईर्ष्या से राजा को झूठ बताया कि तेनाली शतरंज में माहिर है।
    • ✓शतरंज न जानने से तेनाली हारता है और राजा उसे मुंडन का दंड देते हैं।
    • ✓तेनाली अपनी बुद्धि से पाँच हज़ार अशर्फ़ियाँ भी पाता है और दंड से भी बचता है।
    • ✓नाटक में कोष्ठक के निर्देश पात्रों के मनोभाव और मंच की स्थिति बताते हैं।
    • ✓समान अर्थ वाले शब्द (मात-हार, युक्ति-उपाय, न्योता-आमंत्रण) और विशेषण का प्रयोग।

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →नाटक को तीन समूहों में बाँटकर तीनों दृश्यों का मंचन कराइए, जैसा पुस्तक का शिक्षण-संकेत कहता है।
    • →मंचन संभव न हो तो बच्चों को अपनी जगह खड़े होकर पात्रों के संवाद बोलने को कहिए।
    • →कोष्ठक में लिखे भाव (क्रोधित, चकित, घबराकर) पर बच्चों से वैसा चेहरा बनवाइए।
    • →कक्षा में एक शतरंज-बोर्ड लाकर मोहरों के नाम और चालें दिखाइए।
    • →पूछिए — अगर तेनाली शतरंज जानता तो नाटक का अंत कैसा होता?
    • →'मात' शब्द के दोनों अर्थों पर चर्चा कराइए और शीर्षक का अर्थ बच्चों से निकलवाइए।
    • →पुस्तकालय से तेनालीरामन के किस्से पढ़कर 'मित्र-मंडली बैठक' में सुनवाइए।

    📋 Assessment Questions

    1. क्या बच्चा बता सकता है कि दरबारी तेनाली से ईर्ष्या क्यों करते थे?
    2. क्या बच्चा समझा सकता है कि शतरंज खेलते समय राजा को क्रोध क्यों आया?
    3. क्या बच्चा तेनाली की दोनों युक्तियाँ (उधार की अशर्फ़ियाँ और माता-पिता वाली बात) क्रम से बता सकता है?
    4. क्या बच्चा समान अर्थ वाले शब्दों का सही मिलान कर सकता है?
    5. क्या बच्चा प्रसन्न, चकित, दुखी जैसे मनोभावों पर एक-एक संवाद लिख सकता है?